
अभी मार्केट में एक ट्वीट करने पर हजारों से लाखों तक के रेट बताए जा रहे हैं, इन बातों को सुनकर दिमाग हैरान रह जाता है कि ये जानकारियाँ हैं या प्रेरणा? और इनमें कितनी सच्चाई है, दिल यही नहीं मानता कि जिन पत्रकारों को वेतन समय पर नहीं मिलता, किसी ने उनके पीछे लाखों रुपये देकर फिरा होगा—भैया जान, ये इस महीने ट्वीट करने के पैसे हैं। और अगर यह बात सच है, तो यह ईर्ष्या का विषय है कि पाकिस्तानी पत्रकारों के शब्दों की इतनी कीमत है कि एक ट्वीट का रेट लाखों में पहुँच गया है, जो شاید अमेरिका में भी नहीं होगा।
