
यही वर्तमान और भविष्य दिखता है: अमेरिका (और चीन) यह तय कर सकते हैं कि किसे जानकारी तक पहुँच मिलेगी और किसे नहीं। भारत को अपने स्वयं के अग्रणी AI मॉडल बनाने होंगे और उन्हें हमारी संप्रभुता के लिए एक राष्ट्रीय मिशन के रूप में समझना होगा, जैसे हमने ISRO के माध्यम से अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम के साथ किया था।
