
लिखते समय जानबूझकर सकारात्मक शैली और अभिव्यक्ति का उपयोग करें, क्योंकि मनुष्य जन्मजात रूप से नकारात्मक तत्वों से घृणा करते हैं। उदाहरण के लिए, "उज्ज्वल, खुशहाल और चमकदार दुनिया" जैसा वाक्यांश "अंधेरी, दुखी और उदास दुनिया" की तुलना में मस्तिष्क में बिना किसी रोक के सीधे प्रवेश करता है। यही "सकारात्मक लेखन" है।
